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नहीं तोड़े जाएं रोजनदारी करने वालों के हाथ ठेले
कलेक्टर ने दिए निर्देश, महानगर विकास परिषद ने उठाया मुद्दा
इंदौर. इंदौर के कलेक्टर निशांत वरवड़े ने निगम उपायुक्त को सख्त हिदायत देते हुए कहा कि अब रोज हाथ ठेलों पर व्यापार करने वालों के ठेले किसी भी हालत में नहीं तोड़े जाएं एवं ना ही उनका सामान बिखेरकर उन्हें जप्त किए जाएं. आपने कहा किसी भी शासकीय कार्य में मानवीय संवेदना का पक्ष भी ध्यान में रखा जाना चाहिए.
आज महानगर विकास परिषद का प्रतिनिधिमंडल कलेक्टर से मिला. संस्था के अध्यक्ष अशोक डागा, सचिव राजेश अग्रवाल व मीडिया प्रभारी रामस्वरूप मूंदड़ा ने कलेक्टर को निगम द्वारा तीन दिन पूर्व नगर निगम के अधिकारियों द्वारा की गई क्रूरतापूर्ण कार्रवाई की जानकारी दी.
जिसमें निगम के अधिकारियों ने 250 हाथठेले वालों का सामान फेंक कर ना केवल उनके हाथ ठेले जप्त कर लिए गए अपितु उन्हें जेसीबी से तोड़ डाला गया. संस्था के पदाधिकारियों ने कहा कि देश के सबसे बड़े त्योहार दीवाली के ठीक पहले इस तरह की कार्रवाई करना अमानवीय है.
आपने कहा कि अब इन परिवारों की दिवाली ही काली हो गई है. ये लोग ऊँचे भाव में कर्ज लेकर अपनी आजीविका चलाते हैं, इनके ठेले तोड़ देने से इनकी आजीविका ही संकट में आ गई है.
मानवीय संवेदना जरूरी
इस पर कलेक्टर ने परिषद की बात से सरोकार रखते हुए तुरंत निगम उपाआयुक्त देवेन्द्र सिंह को फोन लगाया और स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी सूरत में ऐसी कार्रवाई अब नहीं होना चाहिए। अगर वे यातायात में बाधा बनते हैं तो उन्हें समझाईश देना चाहिए.
उनका सामान फैलाकर ठेले भी जप्त नहीं किये जाना चाहिए. जिलाधीश ने यह भी कहा कि विकास के साथ मानवीय संवेदना होना बेहद जरूरी है.
परिषद के पदाधिकारियों ने कलेक्टर को त्वरित कार्रवाई के लिए धन्यवाद दिया। प्रतिनिधिमंडल में प्रकाश पारवानी, कमलेश नाचन, देवेन्द्र ईनाणी व अरविन्द उपाध्याय भी मौजूद थे।


